पीहर की सूनी गलियाँ...
सावन की लगी मोतियन झड़ियाँ, नयनन से बरसे स्याह बदरियाँ,पीहर से आई कारी कोयलियाँ,बुलाएँ बाबुल की सूनी गलियाँ!पीहर के प्यार की ये कैसी नमी?सौंन्धी खुशबू से महकी भीगी जमीं,कैसे बिसराऊ बाबुल की कमी?पु...
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