GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp Store Sign Up!Login modify पीहर की सूनी गलियाँ... सावन की लगी मोतियन झड़ियाँ, नयनन से बरसे स्याह बदरियाँ,पीहर से आई कारी कोयलियाँ,बुलाएँ बाबुल की सूनी गलियाँ!पीहर के प्यार की ये कैसी नमी?सौंन्धी खुशबू से महकी भीगी जमीं,कैसे बिसराऊ बाबुल की कमी?पु... Label Directed by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े द्वारा कुसुम सुराणा The Critic’s Corner What people are talking about this टिप्पणी लिखें