दोहे!
आगे तीतर हैं चले, पीछे देख बटेर|बना धरा पर घोंसला, पर हैं चला बिखेर ||पवन करें अठखेलियां, घन कजरारे मौन|सजल नयन वर्षाव को, रोक सकेगा कौन?निकली तीतर ढूंढने, तब कर लगत बटेर |देखें सपन सजल नयन, नियती करत...
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