GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify यादों के दीये....गुज़रे थे इन्ही तंग गलियों से हम बार बार! यादों के दीये जल रहे थे रोशनी ले उधार! मद्दीम थी चांदनी,चाँद दरख़्तों के उस पार! कजरारी रात में, कैसे हो सनम का दीदार? महकी चम्पा, चमेली&...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें