स्वप्न-दीप!
शीर्षक: स्वप्न-दीप! मिट्टी के अक्षय स्वप्न-दीप से. दीप-मालाएं जगमगानी चाहिए, गर्म राख में उठी चिंगारी से, क्रांति की मशाल जलनी चाहिए |१|| उम्मीदों की कुंकुम-देहरी प...
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