GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyज़िन्दगी!जिंदगीबड़ी मुश्किल से,मिलती हैं जिंदगी,जाया न किजिए!पत्थर समझ हिरे को,राह चलते मिट्टी में,मिलाया न किजिए! लम्हा-लम्हा जिंदगी,हथेलियों में समेट,खिलखिलाया किजिए!बेवजह गिले-शिकवे,रुठने-मनाने में,गंव...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें