महावीर!
आंजनेय छन्द :सिद्धारथ पुत राज दुलारे।जननी त्रिशला शिशु है प्यारे।।रिद्धि-सिद्धि अब वृद्धि पधारे।लीला अनुपम जनता द्वारे।।१।।मात-कोख रख स्थिरता भारी।सुकल्पना धन-वैभव वारी।।प्रजा राज्य में सुरभित सारी।मध...
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