रोला छंद
प्यारा मेरा गांव, महक सौंधी मिट्टी की।आतुर व्याकुल नैन, राह तकते चिट्ठी की।।बने शहर अब गांव, ठांव है अपनेपन की।बदलो रहकर साथ, भाग्य रेखा जीवन की।।स्वरचित मौलिक रचनाचंचल जैनमुंबई,  महाराष्ट्र
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