ये प्यार ही तो ज़िन्दगी....भाग १६
भाग १६वैदेही को लग रहा था आज उसके सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर गया है.. जब भी वह वज्र से मिलती, वह उससे नज़रे मिलाने से डरती थी.. न जाने कब उसकी पलकों में ठहरे मोती छलक जाएं, उसे खुद पता नहीं था! आखिर शूल स...
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