GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ५७भाग ५७विभा का बिल्कुल मन नहीं लग रहा था! यश प्रैक्टिस के समय अपना मोबाइल ऑफ कर कर रख देता था। उससे बात करनी तो रात के समय ही कॉल करना पड़ता था! विभा तो मानों हँसी-मज़ाक करना ही भूल गई थी। मन को बहुत समझ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें