नि:शब्द पीड़..
शाल-श्रीफल, तमगों-तोहफों का, खुमार अभी बाकी है!मय जो चढ़ी शोहरतों की, उतरनी अभी बाकी है!ढलते सूरज संग 'नारी-सम्मान' अंधियारे में गुम है!'ढाक के तीन पात' सा शोषण, उत्पीड़न, गुमसुम है!दरबारियो...
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