GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyन चाहता हूँ तुम रुको , न चाहता हूँ मैं रुकूं।एक बार फिर से वो पुरानी हर याद ताज़ा हो गयी,फिर दिल सजाया हाथ में फ़रियाद ताज़ा हो गयी,कैसे कहूँ कि देखकर वर्षों पुरानी वो हंसी ख़ुश हूँ या ग़म में हूँ मगर हर बात ताज़ा हो गयी,कैसे ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Akash PandeyThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें