दौहा छंद
नमन माँ शारदेदोहा छंदजोते मिट्टी प्रेम से, बोये बीज किसान।हलधर हिय हर्षित हुआ, देख डोलता धान।।चंचल जैन
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े