GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमन आवेगमन आवेगरोके हम आवेग को, कसना विनय लगाम।बंधन मर्यादा भला, लगती प्रकृति ललाम।।लगती प्रकृति ललाम, सादगी हर दिल जीते।प्यासा हो इंसान, प्यास बुझती जल पीते।।खिलता मन मधुमास, प्रेम से कोई टोके।पिया करे मनुहा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें