GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyकुण्डलिया छन्द - श्रमिक!अविचल राही मार्ग का, चलता कंटक भूल |संभल-संभल चल श्रमिक, पथपर पत्थर-धूल ||पथपर पत्थर-धूल, कोहरा जग में छाया |निर्माता के हाथ, ठीकरा खाली आया ||निर्धन, भूखा लाल, सिर्फ दो रोटी चाही |शोषित-वंचित जीव, मा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें