GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyधड़कनें!होले से दस्तक दे रही जिंदगी,रात ने अंगड़ाई ली अभी-अभी!दिल्लगी बन गई दिल की लगी,चाँदनी मुस्कुराई है अभी-अभी! दरख्तों की आड़ से झाँके माहताब,रात की पलकों में कैद हैं ख़्वाब!खुशनुमा बयार ने छेडा है साज...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें