धड़कनें!
होले से दस्तक दे रही जिंदगी,रात ने अंगड़ाई ली अभी-अभी!दिल्लगी बन गई दिल की लगी,चाँदनी मुस्कुराई है अभी-अभी! दरख्तों की आड़ से झाँके माहताब,रात की पलकों में कैद हैं ख़्वाब!खुशनुमा बयार ने छेडा है साज...
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