साँझ!
शीर्षक : प्यार की बरसात... गोधूलि की बेला है, सूरज निहायत अकेला है, आसमान ने लालिमा खोई है, घंटों निशा की राह जोई है! चाँद ने उपवस्त्र लहराया है, धरा को उबटन लगाया है! दु...
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