GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनफरती दौरनफरती दौर में मोहब्बत की कुछ तो गुंजाइश हो इंसान के सब्र की न इतनी भी आजमाइश हो सियासत ने हमें हर वक्त आपस में लड़ाया हैदिखाना जो भी चाहा है वही हमको दिखाया है कभी मन्दिर कभी मस्जिद, कभी हम नाम पर ल...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Yogesh AwasthiThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें