आशीर्वाद..
जिंदगी की गाड़ी कब मालगाड़ी के डिब्बो की तरह दौड़ते दौड़ते पटरियां बदल चुकी थी पता ही नहीं चला! तीर से जख्म देते शब्द, छुरी सी कातिल नजर और तन मन में नफ़रत का जहर घोलता स्पर्श अब द...
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