पराकाष्ठा हैं जड़ता की...
पराकाष्ठा है जड़ता की...स्व-केंद्रित मानसिकता की।बिच राह में कराहती नारी,दर्द, पीड़ा की खाई है भारी।दर्शक है सभी भीड़ तमाशाई,स्वयं से नहीं व्यवस्था से हारी।पराकाष्ठा है जड़ता की...अनदेखा कर अन्याय, जीने क...
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