GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyपराकाष्ठा हैं जड़ता की...पराकाष्ठा है जड़ता की...स्व-केंद्रित मानसिकता की।बिच राह में कराहती नारी,दर्द, पीड़ा की खाई है भारी।दर्शक है सभी भीड़ तमाशाई,स्वयं से नहीं व्यवस्था से हारी।पराकाष्ठा है जड़ता की...अनदेखा कर अन्याय, जीने क...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें