जननी जन्मभूमि
आर-पार कर पृथ्वी की कक्षा, अन्तरिक्ष को छूं लूँ  माँ भारती का परचम लहराऊँ, अमृत रस पी लूँ।। साहस के कंधों पर चढ़, ब्रह्माण्ड-रहस्य खोज़ लूँ। सागर की गहराइयों में डूब, चुनौतियों को पेलूँ।। बड़े-बड़...
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