नारी!
नारी! धूमिल छवि!नन्हे बच्चे की 'नन्ही सी दुनियाँ ' माँ ! कहाँ है खुद गीले में सो कर बच्चे को सूखे में सुलाने वाली माँ?अंधेरों को चीरती रेल पटरियों पर फ़र्राटे से दौड़ रही है और सामने की सीट पर सोये...
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