एक शाम लिख दूँ मैं....
एक शाम लिख दूं मैं बूढ़े माता-पिता के नाम! जो जीवन की सांझ-बेला में भी, बरगद के पेड की विशाल जटाओं को फैला, धरती की ओर रुख कर व्यस्त रहते थे अपनी नहीं बल्कि अपने जवां बच्चों की ही चिंता में! बढ़ती उम्...
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