GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनवरात्रि!सहस्त्र किरणों से सजा अम्बर का थाल!अरुणिमा से सुशोभित मैय्या का भाल!कैलाशपति प्रिया महागौरी करें निहाल!आरती उतारे माँ, हिमालय पर्वत माल!धवल वस्त्र-धारिणी, निर्मल गंगा की धार, लाल चुन्दड, गले में ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें