गहरे भाव
  ‌दो घंटे हो चुके थे, गिरीश को घर आकर लेकिन वह एक स्तब्ध मूर्ती स्वरूप अपने सोफे पर बैठा रहा। घर में सब लोग थे किन्तु गिरीश न जाने कहाँ खोया हुआ था। बेटी रेश्मा, तुम बाहर कोई डरावना सिनेमा ...
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