अक्षय दीप!
मिट्टी के अक्षय दीप से.दीप-मालाएं जगमगानी चाहिएं  ….गर्म राख में उठी चिंगारी से,क्रांति-मशाल जलनी चाहिए  …||१|| उम्मीदों की कुंकुम-देहरी पर,सहस्त्र स्वस्तिक उभरने चाहिएं   ......
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े