GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyअक्षय दीप!मिट्टी के अक्षय दीप से.दीप-मालाएं जगमगानी चाहिएं ….गर्म राख में उठी चिंगारी से,क्रांति-मशाल जलनी चाहिए …||१|| उम्मीदों की कुंकुम-देहरी पर,सहस्त्र स्वस्तिक उभरने चाहिएं ......LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें