चरण!
जीवन की आपाधापी में, उलझी रिश्तों की डोरी! मन व्याकुल लुकाछिपी में, फिज़ा में धुंध भारी! कौन अपना, कौन पराया, मन में खींचतान जारी! गुरु चरण रज माथे धरूं, कृपा निधान! कृपा न्यारी...
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