ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग १८
भाग १८वज्र की आँख लग गई थी और आबा खिड़की के उस पार से झाँक रहें पूनम के चाँद को देख मन ही मन मुस्कुरा रहें थे... जीवन की आपधापी में वह प्रकृति का आनन्द लेना ही शायद भूल चुके थे..छोटे से गाँव निकला यह क...
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