भटकन!
पार्थ! सदा लक्ष्य को दृष्टि पथ में रखना,स्वयं को भाव-लहर-भटकन से बचाना! प्रश्न-उत्तर के चक्रव्यूह से स्वयं उबरना,धर्म-कर्म-कर्तव्य की डोर को संवारना!सगे-सम्बन्धियों की पंक्तियों से अलिप्त,स्वार्थ...
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