GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग ५३भाग ५३वैदेही और मित्र-मण्डली की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। कल तक अंधेरों में गुमसुम प्रारब्ध की रेखाएं अब सौदामिनी सी चमक रही थी। वैदेही के वाकचातुर्य से सभी प्रभावित थे। प्रधानमंत्रीजी द्वारा उसका स...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें