ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग ५३
भाग ५३वैदेही और मित्र-मण्डली की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। कल तक अंधेरों में गुमसुम प्रारब्ध की रेखाएं अब सौदामिनी सी चमक रही थी। वैदेही के वाकचातुर्य से सभी प्रभावित थे। प्रधानमंत्रीजी द्वारा उसका स...
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