महा शशिवदना छंद!
खेल-खेल में क्यों, खेला कर बैठे।दीदी!  घर तेरे, मेहमान क्यों ऐठे।।बुला लिया सबको, मजे करो, आओ! मूल्य चूका बन्दे, लाठी भी खाओ।।मुँह में उंगली है, अतिथि मेसी के।स्वागत में टुकड़े, बोतल-कुर्सी क...
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