GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyगुरु (मनहरण घनाक्षरी)...अहोभाग्य गुरु मिले,अंतस प्रसून खिले,ज्ञान सुधारस पी लें,लाभ शुभ लीजिए।निराकार ज्ञानी बड़े,काटे अहंकार जडें,कुशल मंगल गढ़े,मीठी वाणी सीखिए।ज्ञान की सरिता बहे,द्वेष-क्रोध-रिपु ढहेआत्म ज्ञान पायें नित...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें