गुरु (मनहरण घनाक्षरी)...
अहोभाग्य गुरु मिले,अंतस प्रसून खिले,ज्ञान सुधारस पी लें,लाभ शुभ लीजिए।निराकार ज्ञानी बड़े,काटे अहंकार जडें,कुशल मंगल गढ़े,मीठी वाणी सीखिए।ज्ञान की सरिता बहे,द्वेष-क्रोध-रिपु ढहेआत्म ज्ञान पायें नित...
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