GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyज़िन्दगी का लेखा-जोखा!कल एक झलक मैंने ज़िन्दगी को देखा,चित्रगुप्त सा किया ज़िन्दगी का लेखा-जोखा!ज़िन्दगी ने दम लगा मुश्किलों का जाल फेंका,मैंने खुद को समझाइश दे हुकमी इक्का फेंका!"ज़िन्दगी की जंग में हार मत,प्रतिकार कर!गलतियों...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें