आत्मसम्मान....
शीर्षक : आत्मसम्मान वृक्ष-वल्ली करें काना-फुंसी, पत्ता-पत्ता करें फूलों से मनमानी, आशंकित सूर्यवंश-बहुरानी, गजगति से चले लखन संग मानिनी! काहे प्रियतम राम नहीं पधारे? काहे लक्ष्मण हमसे नयन ...
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