किसे फुर्सत है यारों...
किसे फुर्सत हैं यारों.. बीती रातों का दुखड़ा सुनने की? कुम्हलाएँ फूल सा मुखड़ा देखने की? पलकों में ठहरे आँसू गिनने की? फटी गुदड़ी को सिने-सिलाने की? घाँवों पर मरहम-पट्टी लगान...
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