GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify किसे फुर्सत है यारों...किसे फुर्सत हैं यारों.. बीती रातों का दुखड़ा सुनने की? कुम्हलाएँ फूल सा मुखड़ा देखने की? पलकों में ठहरे आँसू गिनने की? फटी गुदड़ी को सिने-सिलाने की? घाँवों पर मरहम-पट्टी लगान...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें