क्षोभ!
देख भूस्खलन आपदा, दरक रहा गिरिराज है।गारा, मिट्टी लें बहा, बचा कहाँ अब काज है।आशियाने दफना गएँ, पशु-पक्षी गण मानवी।बादल ऐसे हैं फटे , सृष्टि रूप अब दानवी।।लगी वक़्त की ठोकरें, राजा पल में रंक है।सभी भु...
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