GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyक्षोभ!देख भूस्खलन आपदा, दरक रहा गिरिराज है।गारा, मिट्टी लें बहा, बचा कहाँ अब काज है।आशियाने दफना गएँ, पशु-पक्षी गण मानवी।बादल ऐसे हैं फटे , सृष्टि रूप अब दानवी।।लगी वक़्त की ठोकरें, राजा पल में रंक है।सभी भु...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें