GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदेखो आलमबेफिकरी का आलम तो देखो,देखकर भी अजनबी से निकल गये।अनहद प्यार की ऋतु हुई रुसवा,बगिया में शूल ही शूल उग आये।।चंचल जैनLabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें