भ्रम...
द्विगुनित सुन्दर छन्द12 12 पदान्त : गुरु गुरु भ्रम में मत रहना रे, पाकिस्तानी सारे।वैश्विक निधि से होता, महिमा-मंडन प्यारे।मूल्य लाश का सिक्के, प्रजा जहां नित हारे।ना 'पाक' वतन-बन्दे, भटके म...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े