माटी के पुतले!
शीर्षक : माटी के पुतले! माटी के पुतले तू क्यों करें मनमानी, क्यों रौन्दे चिकनी मिट्टी डाल पानी? नश्वर देहधारी, जाने न तू निज कहानी, माटी मोल काया, माटी में मिल जा...
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