इश्क..
गुलाबी अधरों को चुम मैंने सोचा इश्क़ करूँ, चंपा, चमेली, महुआ मेहंदी रची हथेलियों पे धरूँ! होठों से जो पिलाई पिया, नशा अब भी बाकी है.. जाम छलक गया मगर खुमार अब भी बाकी है .... तेरी जुल्फों के साये म...
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