सावन की रिमझिम बौछारें 
सरपट दौड़ा आया सावन, ले बदरी बौछार  मलयज सौरभ ले हरसाया, भीनी सी रिमझिम फुहार।    नभ से भू तक अगन हटी अब, चली ठंडी मस्त बयार  गड़गड़ाहट, मेघा सरगम, गाएं हलधर मल्हार।    सावन ...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े