GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyकड़वा यथार्थ ढूँढ रहा हैं मासूम नवजात,माता के आँचल की छाँव,पिता की छत्रछाया अरु,चट्टान सी अटल ठाँव।। हद से पार प्रेम दीवानगी,दिखावटी वासना लिपटी,भुलाये पलभर में रिश्तें,वात्सल्य से था जिसे सींचा।। मात पि...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें