पूर्णिमा!
रात की कुक्षी में पल रहा, शुक्ल-पक्ष का चंद्रमा! रक्त-बीज पनप रहा ले माँ के गर्भ-जल से लालिमा! शनै-शनै शशि... शिशु सा, बढ़ रहा गर्भ-मांस-रुधिर में! टुकुर-टुकुर न...
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