GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyआहिस्ता- आहिस्ता....काँटों से सजी सेज पर, मुस्कुराने का हुनर ....सीखा हैं हमने आहिस्ता-आहिस्ता!अपनों के दिए ज़ख्मों पर,नमक का कहर ,सहा हैं हमने आहिस्ता-आहिस्ता!बसंत में पतझड़ का दीदार ,बु...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें