GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyफैसलाफैसलाडोर बेल लगातार बज रही थी। उठकर खोलने का मन ही नहीं था पद्मा का। प्रमोद से झगडा हुआ था उसका। "क्यों मेरी जिंदगी के अहं फैसले प्रमोद लेना चाहता हैं?""क्या मैं अपनी मनमर्जी से कुछ भी नहीं कर सकती?"अ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें