प्रीत....
मनहरण घनाक्षरी में,सादर समीक्षार्थ... तुम प्रीत, तुम गीत, सखा श्याम, मन मीत, कान्हा संग कैसी जीत, बन्धन सारे हटे! कालिंदी किनारे रास, भीगी-भीगी मन आस, मु...
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