जरा मुस्कुरा दो...
मान्यवर! दिल खोल कर मुस्कुरा दो! यहां कंजूसी किस लिए? ऊपरवाले की मेहर है, रच्चणहारे का उपहार है…जम कर मुस्कुराओ ! हँस कर जीवन को उत्सव बनाओ!एक महाशय है हमारे मित्र! जब भी देखो ऐसे मुंह बनाएं रखते है म...
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