यादों के दीये...
शीर्षक : यादों के दीये... गुज़रे थे इन्ही तंग गलियों से हम बार बार! यादों के दीये जल रहे थे रोशनी ले उधार! मद्दीम थी चांदनी,चाँद दरख़्तों के उस पार! कजरारी रात में, कैसे हो सनम का दीदार?...
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