ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग २१
भाग २१सूर्य-रश्मियों की गुदगुदी से परेशान वज्र आँखें मल रहा था तभी बाबा की आवाज़ उसके कानों में पड़ी और वह झट से उठ कर बैठ गया! दरवाज़े पर खड़ी 'आजी' मुस्कुरा रही थी! "पोरा! स्वप्न बघत होतास का रे? " उसके...
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