GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनई सुबह!असत्य की जय जयकार जहां,सत्य दुर्लभ है वहां!अपराधी करे दबंगाई यहां,पीड़ित दुबक कर बैठा तन्हां!बिन पैंदे के लोटे से लोग जहां,हवाओं संग रूख बदले यहां!चट्टानी इरादों वाले विरला,कुर्बान क्यों हो चंद ज...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें