GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify आशीर्वाद!जिंदगी की गाड़ी कब मालगाड़ी के डिब्बो की तरह दौड़ते-दौड़ते पटरियां बदल चुकी थी पता ही नहीं चला! तीर से चुभते, जख्म देते शब्द, छुरी सी ह्रदय को छलनी करती नजर और तन-मन में नफ़रत का जहर घोलता ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें