आशीर्वाद!
जिंदगी की गाड़ी कब मालगाड़ी के डिब्बो की तरह दौड़ते-दौड़ते पटरियां बदल चुकी थी पता ही नहीं चला! तीर से चुभते, जख्म देते शब्द, छुरी सी ह्रदय को छलनी करती नजर और तन-मन में नफ़रत का जहर घोलता ...
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